माँ की मौत पर भी नहीं पिघला बेटों का दिल

माँ की मौत पर भी नहीं पिघला बेटों का दिल

# “शादी का अपशगुन” बताकर ठुकराया अंतिम संस्कार, वृद्ध आश्रम में हुई बुजुर्ग महिला की मौत

जौनपुर। 
गुलाम साबिर
तहलका 24×7
              जिले में मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें दो बेटों ने अपनी 65 वर्षीय मां के अंतिम संस्कार से सिर्फ इसलिए दूरी बना ली कि घर में शादी थी और “शव आने से अपशगुन लगेगा।” मामला जौनपुर के एक वृद्ध आश्रम से जुड़ा है, जहाँ गोरखपुर की रहने वाली शोभा देवी पिछले कई महीनों से रह रही थीं।आश्रय स्थल में बीमारी के कारण शोभा देवी का निधन हो गया।
आश्रम प्रबंधन द्वारा बड़े बेटे को सूचना दी गई तो उसका जवाब सुनकर आश्रम कर्मी भी अवाक रह गए। उसने कहा- “घर में शादी है, अभी शव भेज दोगे तो अपशगुन होगा, चार दिन डीप फ्रीजर में रख दो। आश्रय प्रबंधक रवि चौबे ने रिश्तेदारों की मदद से शव को किसी तरह गोरखपुर भेजवाया। लेकिन वहां भी हालात बदले नहीं। बड़े बेटे ने अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए शव को मिट्टी में दफना दिया और कहा कि शादी के बाद चार दिन बाद खोदकर संस्कार कर देंगे।
मृतका के पति भुआल गुप्ता जो कुछ वर्ष पहले पारिवारिक विवादों के कारण बेघर हुए थे, रोते हुए बोले चार दिन बाद शव की क्या हालत होगी? क्या इसी दिन के लिए हमने बच्चों को पाला था? भरोइया गांव के निवासी भुआल कभी किराना व्यवसाय से परिवार चलाते थे। लेकिन विवाद बढ़ने पर बड़े बेटे ने उन्हें और पत्नी शोभा देवी को घर से निकाल दिया। बेघर होकर भुआल कभी राजघाट, कभी अयोध्या-मथुरा होते हुए जौनपुर के वृद्ध आश्रम पहुंचे, जहां शोभा देवी भी उनके साथ रहने लगीं।
बेटों ने न कभी मिलने की कोशिश की, न ही इलाज में मदद की।आश्रम प्रबंधन का कहना है कि शोभा देवी को बेटे के व्यवहार से गहरा आघात था, बीमारी के दौरान भी वे यही कहती रहीं कि अब बेटों को हमारी परवाह नहीं। घटना ने एक बार फिर समाज की उस सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां वृद्ध माता-पिता को बोझ मानकर छोड़ दिया जाता है। अंतिम संस्कार न करना और उसे अपशगुन बताना, मानवता को कलंकित करने वाला है।
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