आजमगढ़ : जब द्रोणाचार्य ही नहीं हैं तो कैसे तैयार होंगे अर्जुन….

आजमगढ़ : जब द्रोणाचार्य ही नहीं हैं तो कैसे तैयार होंगे अर्जुन….

आजमगढ़।
फैज़ान अहमद
तहलका 24×7
                जनपद में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत है उन्हें निखारने की.. जनपद से बैडमिंटन, क्रिकेट, कबड्डी और कुश्ती के कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। लेकिन दुर्भाग्य है कि जनपद के एक मात्र सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में सभी खेलों के कोच ही नहीं हैं। जिसका परिणाम है कि पंजीकरण कराने के बाद भी 73 खिलाड़ी ऐसे हैं जो अच्छी कोचिंग पाने से वंचित हैं।
नगर के सुखदेव पहलवान सुखदेव स्टेडियम में सुबह से लेकर शाम तक खेलने के लिए खिलाड़ियों का जमघट लगा रहता है। अगर सुविधाओं की बात करें तो खिलाड़ी की सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। वर्तमान में यहां प्रशिक्षकों के चार पद खाली हैं। बैडमिंटन ने जनपद के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है। जनपद के कई खिलाड़ी विदेशों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से उसका कोई कोच यहां तैनात नहीं है। स्टेडियम में बॉक्सिंग रिंग तो लगी है लेकिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने वाले द्रोणाचार्य ही नहीं है। यही हाल वालीबॉल का भी है।
कबड्डी में जनपद के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है लेकिन इस खेल के लिए भी यहां कोई कोच नहीं है। जबकि वर्तमान में मैट पर हो रही कबड्डी को देखते हुए उसकी भी व्यवस्था यहां पर है। अगर खिलाड़ियों की बात करें तो स्टेडियम में कुल 564 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। जिसमें 212 खिलाड़ी शौकिया तौर पर खेलने के लिए पंजीकरण कराए हैं। जबकि 352 खिलाड़ी ऐसे हैं जो शिविरों में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराए हैं। बरसात के मौसम जब भी बारिश होती है। स्टेडियम में बारिश होती है जिससे खिलाड़ी खेल नहीं पाते हैं। इसका मुख्य कारण नाली का स्टेडियम की सतह से ऊपर होना है। काफी दिनों से इसमें मिट्टी भरवाने की जरूरत समझी जा रही है लेकिन बजट के अभाव में यह कार्य नहीं हो पा रहा है।
क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी एके पांडेय ने बताया कि प्रदेश में कुल 450 कोच थे। जिसमें 175 लोगों ने जेम पोर्टल पर पंजीकरण कराया और उनकी ज्वाइनिंग भी हो गई है। लगभग 250 लोग ऐसे हैं जिनकी मांग है कि उनकी नियुक्ति पहले की तरह की जाए। इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। जैसे ही स्टे पर फैसला होता है। रिक्त पड़े पदों पर कोच की तैनाती हो जाएगी। रही बात बैडमिंटन की तो इसके कोच मिलने मुश्किल हैं क्योंकि सरकार की ओर से हम उन्हें 25 हजार देंगे जबकि प्राइवेट संस्थाओं द्वारा उन्हें इससे ज्यादा धनराशि दी जाती है।
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