जश्न-ए-आज़ादी पर‘एक शाम वतन के नाम’ऑल इंडिया मुशायरा, कवि सम्मेलन
# शायरों के कलाम में गूंजी हिंदू-मुस्लिम एकता और देशभक्ति की भावना
शाहगंज, जौनपुर।
एखलाक खान
तहलका 24×7
नगर के आजमगढ़ मार्ग स्थित एक लॉन में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एसएम वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से ‘एक शाम वतन के नाम’ ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ईडेन पब्लिक स्कूल के मैनेजर प्रो. परवेज आलम भुट्टो ने की, जबकि संचालन रजब अली शेरवानी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेता प्रदीप जेसवाल ने किया।

अध्यक्षीय भाषण में प्रो. परवेज आलम भुट्टो ने कहा कि यह साहित्यिक महफिल हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। शायर और साहित्य समाज को जोड़ने का काम करते हैं और देश की आज़ादी में भी इनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि हमें धर्म-मजहब से ऊपर उठकर देश की एकता को बनाए रखना होगा।कार्यक्रम के संरक्षक पूर्व विधायक हाफिज इरशाद ने कहा कि भारत की एकता को कोई नहीं तोड़ सकता। 1857 से लेकर आजादी तक लाखों लोगों ने कुर्बानी दी, इसलिए हमें देश की अखंडता को सर्वोपरि रखना होगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सीओ अजित सिंह चौहान का स्वागत पुष्पगुच्छ और शॉल देकर किया गया। मंच पर अदीबा नाज़, सना लहरपुरी, रीना तिवारी, साजिद प्रतापगढ़ी समेत नामचीन शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिसमें अदीबा नाज ने “यहां पर आके देख दुनिया गंगा-यमुना का संगम, यहां की धरती उगल रही है हीरा और सोना” पढ़कर महफिल लूटी। सना लहरपुरी ने अपने कलाम”खुशबू की लालच में धोखा मत खाना, सांप लिपटे होंगे, चंदन में जंगल ही जंगल है” सुनाया।

रीना तिवारी की देशभक्ति की कविता “सर कटा देंगे, जान लुटा देंगे हम, क्या है दिल में हमारे, बता देंगे हम सुनाकर तालियां बटोरी। वहीं साजिद प्रतापगढ़ी की नज्म “देख कर एक नज़र मुस्कुरा दीजिए, दिल के ज़ख्मों पर मरहम लगा दीजिए” की जमकर तारीफ हुई। संयोजक मुस्तक़ीम अहमद और ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. तारिक बदरुद्दीन शेख ने आए हुए अतिथियों और शायरों का आभार व्यक्त किया।

















