तेज डीजे बना जानलेवा: शोर से बढ़ रहा खतरा, उठे सवाल

तेज डीजे बना जानलेवा: शोर से बढ़ रहा खतरा,उठे सवाल

# लगातार घटनाओं की चर्चा से दहशत,प्रशासनिक सख्ती पर सवाल

जौनपुर। 
गुलाम साबिर 
तहलका 24×7
              शहर में तेज आवाज में बजने वाला डीजे केवल मनोरंजन या शादी-विवाह का साधन नहीं रह गया है,बल्कि इसे लेकर गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं।स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाओं की चर्चा तेज है, जिनमें लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौत तक की बात कही जा रही है।हालांकि इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होना बाकी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक,कुछ समय पहले एक सब्जी विक्रेता की तबीयत तेज डीजे की आवाज के बीच बिगड़ गई थी,जिसके बाद उसकी मौत हो गई।इसी तरह चहारसू चौराहे के पास एक रेस्टोरेंट में नाश्ता करने पहुंची महिला की अचानक तबीयत खराब होने और अस्पताल पहुंचने से पहले मौत की बात भी सामने आई है।हाल ही में एक अन्य व्यक्ति की मौत को लेकर भी क्षेत्र में तेज ध्वनि को कारण बताया जा रहा है।इन घटनाओं ने लोगों में भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक ध्वनि का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सुनने की क्षमता प्रभावित होना,रक्तचाप बढ़ना,हृदय गति में असंतुलन, घबराहट और संवेदनशील मरीजों में हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।कई लोगों ने बताया कि लगातार तेज डीजे और लाउड साउंड के कारण उन्हें सुनने में परेशानी होने लगी है।डॉक्टर भी लंबे समय तक तेज आवाज और ईयरफोन के अधिक उपयोग को नुकसानदेह मानते हैं।
उच्च न्यायालय और प्रशासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन अक्सर नहीं होता।शादी, जुलूस और अन्य आयोजनों में देर रात तक तेज डीजे बजना आम बात बन चुकी है।लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं,क्या प्रशासन इस पर सख्ती करेगा?
लोगों की मांग है कि प्रशासन तेज डीजे पर प्रभावी नियंत्रण करे। निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करे। नियम तोड़ने वालों पर त्वरित कार्रवाई हो।अगर समय रहते इस बढ़ते“शोर के खतरे”पर नियंत्रण नहीं किया गया,तो यह समस्या और गंभीर रुप ले सकती है।
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