आत्मा और शरीर के भेद को समझे बिना परमात्मा को समझना असंभव- ऋषिदेव
खेतासराय।
अज़ीम सिद्दीकी
तहलका 24×7
जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज जी महाराज के आगमन के वार्षिकोत्सव सत्संग कार्यक्रम का आयोजन 16 अक्टूबर को तहसील उपाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा के मनेछा स्थित आवास पर आयोजित हुआ।

सैकड़ों की संख्या में उपस्थित सत्संग प्रेमियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष ऋषिदेव श्रीवास्तव ने आत्मा परमात्मा और शरीर के भेद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंच तत्वों पृथ्वी ,जल, अग्नि ,वायु और आकाश से निर्मित यह मानव शरीर ईश्वर द्वारा निर्मित अनूठी कृति है। इस नश्वर शरीर में चेतन सत्ता विराजमान है जो इस पंच भौतिक शरीर का संचालन करती है। उन्होंने बताया कि यह निष्पाप, निर्लेप, अविनाशी, अजन्मा और निराकार आत्मा माया के वशीभूत होकर अपने मूल अस्तित्व को भूल बैठी है। जो प्रकृति से परे है और उसने अपने आप को शरीर मान लिया है।

उन्होंने कहा कि आज समय के सद्गुरु से नामदान प्राप्त करके हम अपने जीवन के लक्ष्य अर्थात मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं जो हमारे जन्म का परम लक्ष्य है क्योंकि 84 लाख योनियों को भोगने के बाद ही मानव शरीर प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि यह आत्मा ईश्वर के भक्ति भाव और भजन में लीन होकर आवागमन के बंधन से मुक्त हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज मनुष्य मांस, मदिरा और नशाखोरी में पूर्ण रूप से लिप्त हो गया है जो आने वाले भविष्य में उसके लिए हर प्रकार से हानिकारक है। इससे हमारा तन और मन मस्तिष्क दोनों विपरीत दिशा में कार्य करते हैं और तमाम विकार उत्पन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि बिना सतगुरु की शरण में आने से मुक्ति संभव नहीं है।


















