उत्तर प्रदेश: कांग्रेस के ध्वस्त सांगठनिक ढांचे के गठन में भी घमासान

उत्तर प्रदेश: कांग्रेस के ध्वस्त सांगठनिक ढांचे के गठन में भी घमासान

# राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा गांधी के समर्थकों के बीच अरसे से जारी संघर्ष का खामियाजा भुगत रही है पार्टी। जनाधार की खिसकी जमीन वापस लाने की सोच हुई दरकिनार।

# प्रदेश संगठन में जिला स्तर तक चयन की प्रक्रिया गंवई पंचायती बनी, दोनों खेमों का हर नेता जिलों और नगर अध्यक्ष के पदों पर अपने मोहरे बैठाने में लगे।

# इंडिया गठबंधन में तो गठन के समय ही पड़ी दरार लोकसभा चुनाव से पहले सतह पर आई और बाद में चार राज्यों के विस चुनाव के साथ बढ़ती दरार चौड़ी होती खांई यूपी के उप चुनाव के बाद बिखर गई।

कैलाश सिंह
राजनीतिक संपादक
लखनऊ/दिल्ली।
तहलका 24×7                                                           कहते हैं राजनीति में जो दिखता है वैसा होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं। इसका ताजा उदाहरण इंडिया गठबंधन में बिखराव से देखा जा सकता है। किसी भी संगठन के पैमाने का पता चुनावों के परिणाम से लगता है। दिवंगत पूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के कार्यकाल के बाद तेजी से कांग्रेस एक परिवार की पार्टी के रूप में सिमटती चली गई l वर्तमान में इस पार्टी के पदाधिकारी सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा गाँधी के खेमों में विभक्त हैं, लेकिन फ्रंट पर जो समर्थक अंदरूनी संघर्ष या यूं कहें कि पदाधिकारी चाहे जो हो लेकिन उनपर हुकूममत हमारी चलेगी, ऐसे खेमे राहुल और प्रियंका के समर्थकों में चल रहे घमासान से दिख रहा हैl

स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच कांग्रेस संगठन में खींचतान 2024 में लोकसभा चुनाव के पहले से चल रही हैl इसी के चलते पिछले साल ही प्रदेश में बनाई गई नई कमेटी की मिली रिपोर्ट पढ़ने के बाद राहुल गाँधी की सलाह पर उसे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भंग कर दी थीl इसमें पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे lदरअसल कांग्रेस में शुरू से ही ‘दस जनपथ’ की परिक्रमा पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों के लिए चमचागिरी का केन्द्र बन गया था, वही नेता और पदासीन लोग खुद भी प्रदेशों में अपने लिए चमचे खोजते हैं l

प्रियंका वाड्रा गाँधी के निजी सचिव कहिए या सलाहकार संदीप सिंह का नियंत्रण उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन पर इस कदर छाया रहा है कि कमेटी दिल्ली के निर्देश पर काम करने में असहज महसूस करती रही हैl इसे अजय कुमार सिंह लल्लू या वर्तमान में अजय राय को लेकर देखने को मिलता रहा है lपार्टी सूत्रों की मानें तो संभल में शाही जामा मस्जिद और हरि मन्दिर की खोज के लिए हुए सर्वे को लेकर दंगे के बाद जब राहुल और प्रियंका वहां की स्थिति का जायजा लेने निकले तो उन्हें पूर्व से निर्धारित रोक के तहत गाज़ीपुर बार्डर पर स्थानीय प्रशासन ने रोक लियाl

यहां की घटना से पहले पार्टी संगठन ने तय किया था कि यदि रोका गया तो कार्यकर्ता प्रदेश भर में आंदोलन करेंगे लेकिन गाजीपुर बार्डर पर ही कम संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता भी पुलिस के साथ प्रतीक सेल्फी बनाने में लीन हो गए थे l सूत्र बताते हैं कि यहां भी संगठन पर संदीप सिंह के नियंत्रण और निर्देश चल रहे थे लिहाजा प्रदेश में होने वाले शांतिपूर्ण आंदोलन की हवा निकल गईlकांग्रेस का बेहतरीन संगठन फ़िर खड़ा करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खड़गे के निर्देश पर राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा गयाl

उन्हें छह सह प्रभारी भी दिये गए जो राष्ट्रीय कमेटी में सचिव हैं, लेकिन इनमें से कुछ सचिव संदीप सिंह के अपने हैं जो इस चयन प्रक्रिया में अपने खेमे की चलाने में जुटे हैं l यही कारण है कि पार्टी संगठन में चयन प्रक्रिया जस की तस रहीl जिलों के अध्यक्ष और नगर/ महानगर अध्यक्ष पदों के दावेदारों को विगत दिवस लखनऊ बुलाया गया था कि उनसे अलग- अलग बातचीत करके यह समझा जाएगा कि वह इन पदों के लिए उपयुक्त हैं अथवा नहीं, लेकिन चुनाव प्रभारी अविनाश पांडेय और जोन के राजेश तिवारी समेत सभी छह सह प्रभारियों ने हर जिले से आये सैकड़ों दावेदारों से समूह में उनसे उनकी ही काबलियत पूछीl

जाहिर है जो भी आवेदक अकेले में पांच मिनट ही सही जितना खुलकर बताता वह समूह में नहीं बता सकता है l लेकिन चुनाव करने वाले अधिकारियों ने पुरानी पंचायती प्रक्रिया के तहत (हाथ उठाकर) वाले अंदाज़ में इंटरव्यूव लेकर कोरम पूरा कर लिया l इसके पीछे जो असली कहानी है उसका जिक्र संभल और जौनपुर की बानगी के साथ किया जा रहा हैlइस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय वाराणसी के हैंl इनके चुनावी क्षेत्र की एक विधानसभा पिंडरा जौनपुर जिले के मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र में आता हैl

जाहिर है उनका लगाव अन्य जिलों की बजाय जौनपुर से ज्यादा होगा l यहां जिला व नगर अध्यक्ष पद के दावेदारों की संख्या लगभग 25 रही l उनके भरे गए आवेदन फार्म को लेकर लखनऊ पहुंचे चुनाव अधिकारियों ने सभी दावेदारों को भी बुलाया और उनसे उन्हीं के बारे में कम शब्दों में अधिक बताने को समूह के बीच कहा गया, जाहिर है तमाम आवेदक यह मान बैठे कि जिसकी नियुक्ति होनी है उसके नाम का चयन दोनों गुटों में पहुँच रखने वालों का हो चुका है, इसलिए उन्होंने भी अपना बायोडाटा बताने में संक्षिप्त कर दियाl जौनपुर की जिला इकाई में ही तमाम दावेदार दोनों गुटों तक पैठ रखने वाले पार्टी नेताओं के मोहरे बताए जाते हैं l

राजनीतिक विश्लेषक राहुल गाँधी को उनकी पदयात्रा के निर्णय और जन सामान्य से मिलने के तरीकों को बेहतरीन मानते हैं l वह कहते हैं कि कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को फ़िर दूरस्थ गांवों तक पैठ बनाने के लिए जिलों के अध्यक्ष और नगर अध्यक्ष उसी को बनाना चाहिए जिसकी पहुँच हर तबके में ऊपर से लेकर निचले स्तर तक हो l गुटबंदी वाले पदाधिकारी वही काम करेंगे जो उनके आका को पसन्द आयेगा, ऐसे में जनाधार की कल्पना हसीन सपने बनकर रह जाएगी lदूसरी ओर इंडिया गठबंधन के टूटने की बात की जाए तो वह उत्तर प्रदेश में नौ विधान सभा सीटों पर हुए चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट दिखने लगीl

लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी दरार जम्मू कश्मीर, हरियाणा, झारखण्ड, महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों में चौड़ी होती गई लेकिन यूपी में इस गठबंधन के टूटने की आवाज तेज़ होने लगी l तमाम विपक्षी पार्टियां पश्चिम बंगाल की मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी को यदि इंडिया गठबंधन का संयोजक जल्द ही चुन लें तो हैरत नहीं होनी चाहिएl

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