कानपुर : जलीं चिताएं… धधका कलेजा, ड्योढ़ी घाट पर हुआ 26 शवों का अंतिम संस्कार

कानपुर : जलीं चिताएं… धधका कलेजा, ड्योढ़ी घाट पर हुआ 26 शवों का अंतिम संस्कार

कानपुर।
आर एस वर्मा
तहलका 24×7
               कोरथा गांव के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली से शनिवार को बच्चे का मुंडन कराने चंद्रिका देवी गये थे। रात में लौटते वक्त हादसे में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें अधिकांश बच्चे और महिलाएं शामिल थीं। दिल को झकझोर देने वाली घटना से पूरा प्रदेश गमगीन हो गया। रविवार को शवों का अंतिम संस्कार कानपुर के ड्योढ़ी घाट पर किया गया जिसमें एक के बाद एक 13 चिताएं जलीं, वहीं 13 मासूम और किशोर दफनाए गए। यह देखकर घाट पहुंचे हर किसी का कलेजा धधक उठा। श्मशान पर घाट का माहौल वैसे ही गमगीन रहता है। रविवार को एक साथ 26 शवों का अंतिम संस्कार हुआ तो कलेजा कांप उठा। पूरे समय पुलिस, पीएसी व प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।

# कब्र में मासूम के शव रखते वक्त कांप गए हाथ

कलेजे के टुकड़ों को हमेशा के लिए विदा करना आसान नहीं था। कब्र में मासूम के शव रखे जाते समय परिजनों के हाथ कांप गए। घाट पर मौजूद पंडों ने निशुल्क क्रियाकर्म कराया।

# महिला पुलिसकर्मियों ने भी शवों को दिया कंधा

घाट पर सुबह छह बजे ही पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए थे। सुबह करीब 11 बजे के बाद एंबुलेंस से 13 शव ड्योढ़ी घाट पहुंचाए गए। एंबुलेंस पहुंचते ही घाट पर मौजूद महाराजपुर थाने के दरोगा सुमित चौधरी, अमित त्रिपाठी, सौरभ, विजय सिंह चौहान, ललित प्रताप, राजन यादव, रवि शंकर, राहुल कुमार, योगेंद्र कुमार व महिला सिपाही निक्की और संध्या ने शव उतारकर कंधा दिया।

# सुबह ही घाट पहुंचकर प्रधान ने खोदवाई कब्र

महाराजपुर के अहिमा गांव के प्रधान सीतेश कुमार मिश्रा को शनिवार रात ही घटना की जानकारी हो गई थी। यह भी पता था कि ड्योढ़ी घाट पर अंतिम संस्कार होगा। इसलिए वह तड़के ही मजदूरों को लेकर घाट पर पहुंचे। शव दफनाने के लिए कब्र खुदवाने का काम शुरू कराया। साथ ही अंतेष्टि के लिए लकड़ी का इंतजाम कराया।

# दर्जनों गांव के लोग जुटे, दुख बांटा, सांत्वना दी

जिले का शायद यह पहला हादसा है, जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। यह सुनकर आसपास के गांवों के लोग भी कोरथा पहुंचे थे। पीड़ितों का दुख दर्द बांटा और उन्हें सांत्वना देते रहे। अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
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