जौनपुर के अधिकतर नर्सिंगहोम बने इंसानी स्लाटर हाउस, यहां कटती है मरीजों की जेब! 

जौनपुर के अधिकतर नर्सिंगहोम बने इंसानी स्लाटर हाउस, यहां कटती है मरीजों की जेब! 

# कमीशनखोर दलाल के जरिए तीमारदारों को बरगलाकर जिला अस्पताल से मरीजों को अपने यहां भर्ती करते हैं निजी अस्पताल संचालक, बेहतर इलाज के नाम पर तन से खींचते हैं कफ़न, मरने के बाद कोमा में बताकर फ़िर भेजते हैं राजकीय चिकित्सालय, हंगामा होने पर जिला व स्वास्थ्य प्रशासन बंदरबांट की भूमिका में नज़र आता है। 

कैलाश सिंह
वाराणसी/जौनपुर।
तहलका 24×7
              कोरोना काल निजी चिकित्सकों को ‘आपदा में अवसर’ का ऐसा फार्मूला दे गया कि उसमें से ‘डर’ को मॉडिफाई करके उसके जरिए मरीजों को वैधानिक तरीके से लूटा जाने लगा है। कमोबेश यह स्थिति पूर्वांचल के अधिकतर जिलों में शहर से लेकर कस्बों तक देखने-सुनने और भुगतने को मिल रही है। जिला अस्पतालों में तैनात कुछ डॉक्टर व कर्मचारी भी निजी अस्पतालों के लिए कमीशन पर काम करने में नहीं हिचकते।
जिला व स्वास्थ्य प्रशासन समझौते व जांच के नाम पर बन्दरबांट की भूमिका में नज़र आता है।इसी तीन अप्रैल को जौनपुर का नईगंज इलाका जो इंसानी मरीजों के लिए स्लाटर हाऊस का दर्जा प्राप्त है। यहां के एक नर्सिंगहोम में भर्ती हादसे के शिकार शुभम निषाद नामक युवक की मौत होने पर उसके परिजनों को शव देने से इसलिए मना किया गया ताकि कथित बकाया रकम वसूल हो जाए। जब परिजनों का हंगामा बवाल में तब्दील हुआ तो अस्पताल संचालक के कथित वाहन चालक/मैनेजर ने (पेड पुलिस) बुला लिया, स्थिति नहीं संभली तब जिला व स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े लोग पहुंचे।
इसके बाद पीड़ित परिजनों से शिकायती पत्र लेकर मामले को रफादफा कर दिया गया।विदित हो कि इस अस्पताल का कथित डॉक्टर कोरोनाकाल में ही बग़ैर प्रैक्टिकल व परीक्षा दिये डिग्री लेकर सीधे जौनपुर के नईगंज में पहुंचा, शहर के हाईवे पर एक बहुमंजिला भवन किराए पर लेकर मल्टी स्पेशियलिटी वाली दुकान खोल लिया। यहां वाहन स्टैंड सड़क की पटरी को बना दिया और उसके स्थान पर मरीजों के बैठने और मेडिकल स्टोर खोल लिया।
इस स्टोर पर खुद की एमआरपी कराई गई 10 रुपये की दवा सौ रुपये में बेची जा रही है। ऐसा कमोबेश अधिकतर निजी अस्पतालों में हो रहा है।इस अस्पताल के डॉक्टर की खासियत ये है कि सामाजिक हैसियत रखने वाले मरीजों के बिल बढ़ाये रखता है ताकि किसी नेता का सोर्स लगने पर वह बढी रकम से कुछ छूट देकर खुश कर दे। दलालों की फ़ौज का संचालन इसका पिता करता है जो खुद कस्बे का डॉक्टर रहा है।
इसके समेत तमाम नर्सिंगहोम संचालकों के यहां ‘पेड पुलिस’ की व्यवस्था रहती है मरीजों और तीमारदारों को डराने के लिए, इसी क्रम में गोरखपुर-प्रयागराज हाईवे पर स्थित एक अस्पताल का डॉक्टर खुद की बीवी से हफ़्ते में एक दिन जरूर पिटता है।अपने गलत आचरण के चलते, ऐसे कई और हैं जो नर्सों पर फिदा हैं और पत्नी से तलाक की नौबत है।इसकी गोल में कुछ और शुमार हैं।
इनका सहयोग पुरोहित गैंग का ‘फर्जी पत्रकार, शिक्षक, व्यवसायी अकेले करता है। इसके धंधे में सैंडविच मसाज पार्लर काफी फेमस है। इसके अलावा कुछ चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं जो बच्चों के इलाज में अभिभावकों का खून चूसते हैं। आयुष्मान कार्डधारी मरीजों व सरकार को लूटने वाले कारीगर भी यहां बढ़ते जा रहे हैं। इसमें उनका साथ जिला व स्वास्थ्य प्रशासन देता है। इसका विस्तार अगली कड़ियों में मिलेगा। जौनपुर में एक ऐसा कथित डॉक्टर भी है जो डेढ़ दशक से बग़ैर डिग्री के फिजिशियन है। 2020 में उसने एमडी की डिग्री 35 लाख में खरीदी और सिटी स्टेशन रोड पर अपनी दुकान खोल ली।
क्रमशः……
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