देश के 12 राज्यों में ED व NIA के छापे, PFI अध्यक्ष सहित 106 लोग गिरफ्तार

देश के 12 राज्यों में ED व NIA के छापे, PFI अध्यक्ष सहित 106 लोग गिरफ्तार

# लखनऊ में भी हुई कार्रवाई, 2 लोगों की गिरफ्तारी, आपत्तिजनक सामग्री बरामद

# रात एक बजे से सुबह 7 बजे तक चली कार्रवाई, विरोध में कई जगह प्रर्दशन भी

लखनऊ/नई दिल्ली।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24X7
                यूपी की राजधानी लखनऊ सहित देश के 11 राज्यों में ईडी और एनआईए ने राज्यों की पुलिस के साथ पीएफआई और उससे जुड़े लोगों की ट्रेनिंग, गतिविधियों, टेरर फंडिंग और लोगों को संगठन से जोड़ने को लेकर बड़े पैमाने पर छापेमारी कर सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पीएफआई अध्यक्ष परवेज अहमद व उसका भाई भी शामिल है। लखनऊ के इंदिरानगर क्षेत्र से भी 2 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। खबर लिखे जाने तक पीएफआई से जुड़े 106 लोगों की गिरफ्तारी किए जाने की पुष्टि की गई थी, जबकि कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी। सबसे जयादा 22 लोगों की केरल से गिरफ्तारी हुई है। देर रात एक बजे से आज सुबह 7 बजे तक छापों की कार्रवाई चली।
यूपी की राजधानी इंदिरानगर इलाके से संदिग्ध वसीम को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की गई हैं। इसके अलावा लखनऊ के लवकुश नगर से एक अन्य की भी गिरफ्तारी की खबर है। लखनऊ में हुई कार्रवाई का विस्तृत विवरण अभी नहीं मिल सका है। उप्र से इस कार्रवाई में अब तक 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। इसमें से वाराणसी से दो संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया है। 12 राज्यों में ईडी, एनआईए और राज्यों की पुलिस ने 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये अब तक का सबसे बड़ा एक्शन है। जांच एजेंसी ने सबसे ज्यादा केरल से 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। उसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक से 20-20, आंध्र प्रदेश से 5, असम से 9, दिल्ली से 3, मध्य प्रदेश से 4, पुडुच्चेरी से 3, तमिलनाडु से 10, यूपी से 8 और राजस्थान से 2 लोगों को गिरफ्तार किया है।

देर रात शुरू हुए ईडी, एनआईए और राज्यों की पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार नजर बनाए हुए हैं। पीएफआई से जुड़े लोगों पर कार्रवाई के बाद बेंगलुरु और मंगलुरु में एसडीपीआई और पीएफआई कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। इसके पहले 18 सितंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 40 ठिकानों पर छापेमारी की थी। पीएफआई पर कानपुर हिंसा, आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और धर्म के आधार पर नफरत फैलाने के कई आरोप लगते रहते हैं। दिल्ली में सीएए आंदोलन से लेकर मुजफ्फरनगर, शामली और मध्य प्रदेश के खरगौन में हुई सांप्रदायिक हिंसा में पीएफआई से तार जुड़े होने का दावा किया जा रहा है।

बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की शुरुआत साल 2006 में केरल में हुई थी। 2006 में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय के बाद पीएफआई अस्तित्व में आया। तीनों संगठनों में राष्ट्रीय विकास मोर्चा, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु की मनिथा नीति पासारी थे। 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद दक्षिण में इस तरह के कई संगठन सामने आए थे। उनमें से कुछ संगठनों को मिलाकर पीएफआई का गठन किया गया। तब से ही यह संगठन देशभर में कार्यक्रम आयोजित करवाता है। अपने 16 साल के इतिहास में पीएफआई दावा करता है कि उसकी देश के 23 राज्यों में इकाइयां है।पीएफआई का मुख्यालय कोझीकोड में था, लेकिन लगातार विस्तार के कारण इसका सेंट्रल ऑफिस राजधानी दिल्ली में खोला गया है।
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