जिंदगी बनके तमाशा गुजरी और हम खुद तमाशबीन हुए
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7. साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था कोशिश का वार्षिकोत्सव टीडी कालेज के बलरामपुर सभागार में आयोजित हुआ। मां वीणापाणि की आराधना के पश्चात प्रो. आरएन सिंह, प्रो. वशिष्ठ अनूप और सम्मानित मंच ने काव्य-संग्रह ऋत्विक स्वरका लोकार्पण किया। साथ में कवि गिरीश श्रीवास्तव के मुक्तक संग्रह गिरीश के मुक्तक व रामजीत मिश्र रचित कहानी संग्रह प्रेम न हाट बिकाय, आशिक जौनपुरी की रचना जज्ब-ए-इश्क, कहानीकार रेणुका अस्थाना की कहानी संग्रह कालिंजर का विमोचन हुआ।

तत्पश्चात आजमगढ़ से पधारे गीतकार डा. ईश्वर चन्द त्रिपाठी ने शेर पढा “जिंदगी बनके तमाशा गुजरी, और हम खुद तमाशबीन हुए” शायर अहमद निसार का शेर “धूप गम का किसी के पास न हो, कुछ करें हम कोई निराश न हो” खूब पसंद किया गया। भालचंद्र त्रिपाठी ने जब पढ़ा “गम के चेहरे पर नूर हो जाएं, आईना चूर-चूर हो जाए” सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भोजपुरी के कवि डा. कमलेश राय का गीत “हम पतझर में प्रीत जगाके, पात-पात मधुमास लिखिला” वसंत की मादकता को रेखांकित कर गया। वहीं प्रो.आरएन सिंह ने कहा “आज नहीं तो कल निकलेगा, हर मुश्किल का हल निकलेगा”।

गिरीश कुमार गिरीश का मुक्तक “मेरी ख़्वाहिश है ख़्वाब जिन्दा रहे, खिलखिलाता गुलाब जिन्दा रहे। लिखने वाला लिखा है शिद्दत से, पढिए ताकि किताब जिंदा रहे” पाठकीय अभाव को रेखांकित किया। वहीं अशोक मिश्र ने अपनी कविता” निर्बल की मजदूरी तंत्र छीन खाता है, तब कन्हैया आता है” से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया।

सभाजीत द्विवेदी प्रखर के देशभक्ति के छंद खूब पसंद किए गए। अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ प्रो. वशिष्ठ अनूप का शेर “नजारा देखना है तो हमारे गांव मे देखे, मगर के साथ कैसे आदमी पानी में रहता है” कहकर विसंगति पर वार किया।

सम्मेलन में डा. संजय सिंह सागर, अनिल उपाध्याय, राजेश पांडेय, नंदलाल, समीर, आलोक, रंजन सिन्हा, सुमित श्रीवास्तव, फूलचंद भारती, दमयंती सिंह, अमृत प्रकाश, अंसार जौनपुरी, डा. विमला सिंह, अनिल विश्वकर्मा, रेणुका अष्ठाना, ज्ञान प्रकाश आकुल, डा. अजय सिंह, कमलेश कुमार ने काव्य पाठ किया।

















