भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: क्या है पूरा विवाद?
भोजपुर।
तहलका 24×7
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ के बाद मौत का मामला इन दिनों बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में बड़ा मुद्दा बना हुआ है।घटना को लेकर पुलिस और परिजनों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं,जिसके चलते मामले की न्यायिक जांच तक के आदेश दिए गए हैं।

बताया जाता है कि भरत भूषण तिवारी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और स्थानीय मुद्दों,खासकर विस्थापितों और विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठा रहे थे।उन्होंने फेसबुक लाइव के दौरान हाथ में पिस्टल लेकर कई वीडियो प्रसारित किए थे।वीडियो में वह खुद को “क्रांतिकारी” बताते हुए नेताओं और प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे। वहीं पुलिस के अनुसार भरत भूषण तिवारी अवैध हथियार लेकर घूम रहे थे और फेसबुक लाइव के दौरान फायरिंग भी की थी।

जब पुलिस उन्हें समझाने और पकड़ने पहुंची तो उन्होंने कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई,जिससे वह घायल हो गए।उन्हें इलाज के लिए पटना भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।परिजनों का आरोप है कि भरत ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था,इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मारी। परिवार का कहना है कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि फर्जी एनकाउंटर है।

मृतक के पिता और भाई ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सरकार को घेरा है।सांसद पप्पू यादव ने भरत तिवारी को “आज का भगत सिंह” बताते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है।

बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं।साथ ही, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,प्रारंभिक स्तर पर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है।एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी के पिता,भाई और पंचायत मुखिया के खिलाफ भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस का आरोप है कि परिवार ने अवैध हथियार रखने और आरोपी को संरक्षण देने का काम किया।

दूसरी ओर, परिजन इसे दबाव बनाने की कार्रवाई बता रहे हैं।मामले की न्यायिक जांच शुरु होने जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट,बैलिस्टिक जांच,वीडियो फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह वास्तविक मुठभेड़ थी या परिजनों के आरोपों के अनुसार फर्जी एनकाउंटर।फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है।तिवारी की मौत के बाद सत्ता पक्ष के लोग मुखर हो रहे वहीं प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी की चुप्पी बड़ा सवाल और चर्चा बनी है।


















