जौनपुर : डीएम साहेब ! डाक्टर ने ले ली मेरी फूल सी बच्ची की जान…
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
डीएम साहेब… डाक्टर ने मेरी फूल सी बिटिया की ले ली जान.. अब वह कभी वापस नहीं आने वाली ! हम चाहते है कि भविष्य में कोई भी बाप अपने कलेजे के टुकड़े को न खोये और डॉ अभिषेक मिश्रा के गलत इलाज और लापरवाही का शिकार ना हो। मासूम बच्चों के स्वास्थ्य हित को देखते हुए मामले को गंभीरता लें और डॉ अभिषेक मिश्रा व उनके अस्पताल के कार्यशैली का निष्पक्ष जांच कराईये। यह दर्दभरा निवेदन नगर के कोतवाली चौराहे के निवासी सिद्धार्थ साहू ने किया है। उसकी दर्दभरी दस्तां सुनकर डीएम ने तत्काल सीएमओ को मामले की गहनता से जांच का आदेश दिया।

शनिवार को सिद्धार्थ कुमार साहू ने डीएम मनीष कुमार वर्मा से मिलकर बताया कि मैंने अपनी इकलौती बेटी वंशिका साहू (12) को 19 अक्टूबर को हल्के बुखार व पेट दर्द होने के कारण नगर के पॉलिटेक्निक रोड स्थित ओम साईं बाल चिकित्सालय में डॉ अभिषेक मिश्रा को दिखाया। बेटी को देख उन्होंने मुझे आश्वासन देते हुए 5 दिन की दवा दिया लेकिन 1 दिन की दवा खाने के बाद 20 तारीख की रात मेरी बिटिया के पेट में दर्द हद से ज्यादा बढ़ गया जिसके चलते मैंने अपनी बिटिया को अगले दिन 21 अक्टूबर को दोबारा अभिषेक मिश्रा को दिखाया जिस पर उन्होंने मेरी पुत्री की कई तरह की जांच कराई और उसे भर्ती कर लिया। दिनांक 21 को सारा दिन उन्होंने मेरी बिटिया का इलाज करते हुए उसे इंजेक्शन और दवाईयां दिया लेकिन बच्ची की स्थिति और बिगड़ती जा रही थी। स्थिति को देखते हुए मैंने डॉक्टर अभिषेक मिश्रा से 22 तारीख को आग्रह करते हुए कहा कि अगर वह केस को नहीं संभाल सकते तो वो हमारी बिटिया को वाराणसी या प्रयागराज रिफर कर दे परंतु डॉ अभिषेक मिश्रा की लापरवाही कहा जाए या उनके धन उगाही की नीयत जिसकी वजह से उन्होंने हमें दोबारा झूठा आश्वासन देते हुए कहा कि पेशेंट को कोई दिक्कत नहीं होगी और 23 तारीख की सुबह तक मेरी बिटिया का प्लेटलेट्स 21000 हो गया।

जिस पर डॉ अभिषेक मिश्रा ने हमें दो यूनिट प्लेटलेट्स का इंतजाम करने को बोला। 23 अक्टूबर को सुबह मेरी बेटी दर्द से तड़प रही थी बोल रही थी कि उसका पैर हद से ज्यादा दर्द कर रहा है और लगातार नहाने की जिद करते हुए हॉस्पिटल बदलने को कह रही थी। 12 वर्षीय नन्ही सी जान को हार्ड इंजेक्शन लगाए जाने की वजह से उसका शरीर भीतर से जल रहा था। दिनांक 23 की सुबह जब डॉक्टर अभिषेक मिश्रा राउंड पर आये तो मैंने उनसे बेटी का पूरा हाल बताते हुए पुनः आग्रह किया कि वह उसे डिस्चार्ज कर कही और रिफर कर दें क्योंकि बेटी की तकलीफ बढ़ती है जा रही है परन्तु डॉ अभिषेक मिश्रा अपने सैकड़ों मरीज को देखने की जल्दी में दोबारा झूठा विश्वास दिलासा देते हुए आश्वासन दिया कि हम फिक्र ना करें लड़की बिल्कुल ठीक हो जाएगी और फिर कुछ इंजेक्शन लगवा कर चले गए।

मेरी बेटी के दर्द के चलते अस्पताल में तड़प रही थी और परिवार के अन्य सदस्य प्लेटलेट्स के इन्तेजाम में सारा दिन भटक रहे थे। किसी तरह शाम 7 बजे 1 यूनिट प्लेटलेट्स का इन्तेजाम हुआ और लाकर हॉस्पिटल को दिया गया तब तक मेरी बेटी दर्द और जलन से पागल हो चुकी थी जिसके बाद डॉ ज़बरदस्ती बुलाने पर आते हैं और दिनांक 23 को 8-9 बजे के बीच प्लेटलेट्स चढ़वाते हैं जिसके बाद दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया और बिटिया की स्थिति काबू करने के चक्कर में उन्होंने उसे कोई फिर इंजेक्शन दिया जिससे कुछ ही देर बाद मेरी फूल से बिटिया के मुंह से झाग आने लगा और वह बोलने लगी पापा मेरे पैर पत्थर हो रहा है।

यह बात सुनते ही डॉ अभिषेक मिश्रा ने अपने कर्मचारियों को तत्काल निर्देश दिया कि वह लड़की को इमरजेंसी रूम में शिफ्ट करे। जहां शिफ्ट करने के बाद मेरी बिटिया को डॉक्टर अभिषेक मिश्रा ने ऑक्सीजन पर रखा और चेकअप शुरू किया ओक्सीमीटर लगाने पर जब उन्हें पल्स नहीं मिल रही थी तो उन्होंने अपने स्टाफ को निर्देश दिया कि तुरंत इस बच्ची को एम्बुलेंस में डालो और बनारस ले जाओ। आनन-फानन में हम अपनी बिटिया को एंबुलेंस में लेकर तुरंत निकले क्योंकि वह उस वक्त चिल्ला रही थी और मौत से लड़ रही थी इस उम्मीद से हम तुरंत वहां से निकले और उसे डॉक्टर अभिषेक मिश्रा ने न ही डिस्चार्ज लेटर दिया और ना ही रेफर लैटर दिया। बस.. ऐसे ही जाने दिया। मैं और मेरी पत्नी आनन-फानन में अपनी बच्ची को लेकर बनारस गैलेक्सी हॉस्पिटल पहुंचे वहां पहुंचने के उपरांत गैलेक्सी हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बच्ची की जांच की और कहा कि बच्ची में कुछ नहीं बचा है आप वापस लेते जाएं। डॉ अभिषेक मिश्रा के गलत इलाज व लापरवाही के चलते मेरी बच्ची वंशिका साहू की मृत्यु हो गई।

यह पहला वाक्या नहीं है ऐसा मामला नगर में कुकुरमुत्ते की तरह उगे तमाम हास्पिटलों में रोजाना दर्जनों परिवार को झेलना पड़ता हैं। कभी-कभार सिद्धार्थ साहू जैसा बाप अपनी दास्तान जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाता है और तब जिला प्रशासन कुछ हरकत में आता है और कोरम पूरा करने के लिए कुछ जांच-पड़ताल कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। चिकित्सा क्षेत्र में फैले संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार ने पूरे सूबे के हरेक मुख्य चिकित्साधिकारी को रोजाना 5-6 हास्पिटलों का आकस्मिक निरीक्षण करने का आदेश दिया है और शाम तक रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देशित किया है। अब देखना होगा कि सिद्धार्थ जैसे कितने बाप को न्याय मिल पाता है।

















